जाधव को राहत

 


 


 



हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने पूर्व भारतीय नौसैनिक अधिकारी को पाक में फांसी देने के फैसले पर रोक लगाने तथा उसकी गिरफ्तारी व न्यायिक प्रक्रिया में वियना संधि का उल्लंघन बताते हुए पाक को खरी-खोटी सुनाई है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने 15-1 के बहुमत वाले फैसले में पाक स्थित सैन्य अदालत में जाधव के मामले की सुनवाई को अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए मामले को सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत लाने और जाधव को कौंसुलर एक्सेस उपलब्ध कराने का निर्देश पाक को दिया है। नि:संदेह कोर्ट का यह फैसला जहां मानवाधिकारों के अनुरूप है वहीं अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी के लिये नजीर का फैसला है। हालांकि, कोर्ट ने जाधव की रिहाई की बात को स्वीकार नहीं किया, मगर किसी हद तक फैसला भारतीय आकांक्षाओं के अनुरूप है। कोर्ट ने जो सख्त टिप्पणियां की हैं, वह पाकिस्तान के लिये शर्मिंदगी का विषय होना चाहिए। भारत की अधिकांश बातों से सहमति जताते हुए अंतर्राष्ट्रीय अदालत ने जाधव की मौत की सजा पर पुनर्विचार करने व सजा की समीक्षा करने को कहा है। साथ ही कौंसुलर एक्सेस देने के साथ ही पाक के संविधान के अनुरूप निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने तथा कानूनी प्रतिनिधि देने को भी कहा है। उल्लेखनीय की तीन मार्च 2016 को पाकिस्तान ने जाधव की गिरफ्तारी बलूचिस्तान प्रांत से दिखायी थी, जबकि भारत का आरोप है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया था जहां उनका निजी कारोबार था। हालांकि पाक के पास जाधव को दोषी ठहराने के लिये मारपीट कर जबरदस्ती दिलवाए गए इकबालिया बयान के अलावा कोई ठोस सबूत नहीं है। तत्कालीन पाक विदेशी मंत्री तक का बयान आया था कि उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं। इसके बाद सेना ने उनके बयानों को खारिज कर दिया था। दरअसल, पाक तमाम अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा आतंकवाद को प्रश्रय देने के गंभीर आरोपों से खुद को बचाने के लिये जाधव प्रकरण को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
हालांकि पाक सरकार व पाकिस्तानी मीडिया फैसले को अपनी जीत बता रहा है, मगर हकीकत में पंद्रह जजों द्वारा दिया गया इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस का फैसला अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में पाक की शर्मिंदगी का पर्याय है। पहली बार आईसीजे के इतिहास में खुले तौर पर किसी देश को गलत ठहराया गया। नि:संदेह कोर्ट का फैसला आने वाले समय में मानवाधिकारों की रक्षा की दिशा में एक नजीर साबित हो सकता है जो राजनीतिक शत्रुतावश गिरफ्तार विदेशी व्यक्ति के मानवाधिकारों की रक्षा कर सकेगा। हेग स्थित कोर्ट के इस आदेश के परिप्रेक्ष्य में पिछले दिनों बिना किसी वजह के छह साल की कड़ी सजा के बाद छोड़े गये भारतीय युवा हामिद अंसारी तथा कोर्ट द्वारा बरी किये गये सरबजीत सिंह, चमेल सिंह के प्रकरण भी देखने चाहिए, जिनको साजिश के तहत जेल में ही मार दिया गया। कोर्ट के आदेश पर ही जाधव की मां व पत्नी को मिलने देने की प्रक्रिया के दौरान उन्हें जिस तरह पाक हुक्मरानों ने अपमानित व प्रताडि़त किया, वह किसी से छिपा नहीं है। भारत को अदालत के इस फैसले को पाक के खिलाफ एक मौके के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए ताकि पूरी दुनिया को उसकी करतूतों को बताया जा सके। जर्जर आर्थिक व्यवस्था वाला पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय दबाव से मुक्त होने की कोशिश में जाधव के मामले को तूल दे रहा है। इसी दबाव के चलते उसने दिखावे के लिये आतंकी सरगना हाफिज सईद को गिरफ्तार करने का प्रपंच रचा है। हाल ही में भारत के लिये पाक से होकर गुजरने वाले हवाई मार्ग को खोलने तथा हाफिज सईद की गिरफ्तारी को पाक प्रधानमंत्री इमरान खान की व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली मुलाकात की तैयारी के रूप में देखना चाहिए। इस चालबाजी को समझते हुए भारत को जाधव को मुक्त कराने के कूटनीतिक प्रयास तेज करने होंगे।


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