कुटुंब प्रबोधन से ही आएगी सामाजिक एकता: अम्बिका 


एटा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय कुटुंब प्रबोधन के प्रांत प्रमुख अम्बिका कुटुंब प्रबोधन (परिवारिक जागरण) के बिना सामाजिक एकता संभव नहीं है। परिवारों में ही ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि किसी को किसी के लिए समय नहीं है, ऐसे में समाजहित में सोचना लोगों के लिए और भी मुश्किल हो गया है। इसलिए आज सबसे बड़ी जरूरत कुटुंब प्रबोधन की है। उन्होंने कहा कि भारत हमारी मां है, केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, इसलिए सभी में सामाजिक सेवा की भावना होनी चाहिए। यह भावना होगी तो ही हम देश के लिए बड़े से बड़ा बलिदान दे सकते हैं।
 अम्बिका जी शहर के शांती नगर स्थित केशव सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित कुटुंब प्रबोधन कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने टूटते परिवार, बिखरते समाज के प्रति गहरी चिंता जताई और सभी से आह्वान किया कि परिवारिक और सामाजिक रिश्ते ही हमारी पूंजी है, इसलिए इसे बचाए रखें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोग बच्चों के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं। 
 उन्होंने यह भी कहा हमें समय-समय पर उन लोगों को भी अपने परिवारिक सदस्यों के रूप में अपनाते हुए उनके सुख-दुःख में हिस्सेदार बनना चाहिए जो हमारे लिए किसी न किसी काम आते हैं। चाहे कोई हमारे लिए दूध लाता हो, हमारे घर में कपड़े धोता हो या फिर किसी अन्य काम में हमारा सहयोगी बनता हो। ऐसे हर व्यक्ति का ख्याल रखना हमारा कर्तव्य है। 
 इस अवसर पर नगर पालिकाध्यक्षा मीरागांधी, पूर्व चेयरमैन राकेश गांधी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विभाग प्रचारक अरुण कुमार, कार्यक्रम संयोजक कमलेश मिश्रा, प्रांतीय टोली कुटंुब प्रबोधन क्षेत्रपाल सिंह उपाध्याय, राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ के नगर कार्यवाह गिरीश चन्द्र अमित जौहरी एडवोकेट के अलावा आदि अनेक लोग मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालक कुटंुब प्रबोधन के नगर संयोजक अमित जौहरी एडवोकेट द्वारा किया गया। 
फोटो 26 ईटीए-103 कैप्शन-शहर के केशव सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित कुटंुब प्रबोधन कार्यक्रम में उपस्थित लोग।